Tuesday, March 29, 2011

गोरेश्‍वर महादेव की महिमा अपरंपार

आज तक चैनल पर डूंगरपुर जिले के गोरेश्वर शिव धाम पर एक रिपोर्ट
आज तक के रिपोर्टर विवेक भट्ट की प्रस्तुति

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Tuesday, March 8, 2011

महिला दिवस पर लीला की कहानी

आज की महिलाएं अन्तरिक्ष से लेकर एवरेस्ट को फतह करने, साईकिल रिक्शा चालक से लेकर रेल ड्राईवर का पेशा अपनाने तथा पुलिस से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक का गौरव हासिल कर अपनी अदम्य शक्ति का लोहा मनवा चुकी हैं वहीं दूसरी ओर सड़क किनारे अपनी जर्जर झौंपड़ी की तरह दम तोड़ती जिंदगी को संभालने के लिए टू-व्हीलर का पंचर निकाल कर अपने पति, ससुर और चार बच्चों वाले बड़े परिवार का भरण पोषण का जज्बा रखने वाली बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ उपखण्ड मुख्यालय के समीप बड़वास छोटी गांव की लीला पत्नी गटु यादव महिला शक्ति की साक्षात मिसाल बनी हुई है। अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर वर्तमान पुरूष प्रधान समाज के कड़वे यथार्थ को बयां करती यह तस्वीर।

Tuesday, August 31, 2010

कुदरत का करिश्मा: श्वेतार्क मूल में मिले गजानन

इसे कुदरत का करिश्मा ही कहा जाएगा कि जिस पौधे को विघ्नहर्ता देव गणेश का प्रतीक माना जाता है उसके मूल में स्वयं गजानन विराजमान दिखाई दे। ऎसा ही एक वाकया यहां डूंगरपुर न्यू कॉलोनी में नज़र आया है जहां गणेश के प्रतीकरूप माने जाने वाले श्वेतार्क (सफेद आक) के पौधे की खुदाई दौरान मूल के रूप में भगवान गणेश की प्रतिकृति दिखाई दी। प्रकरणानुसार न्यू कॉलोनी में जिला परिवहन कार्यालय के समीप रहने वाले हरिश पहाड़ के आंगन में एक बड़े श्वेतार्क के सूखने के बाद जब इसे जड़ सहित निकाला गया तो आश्चर्यजनक रूप में भगवान गणेश की आकृति में जड़ दिखाई दी। फिर क्या था घर में तो जैसे साक्षात गणेश के प्रकट होने की खुशी छा गई। बस तभी से पहाड़ की अद्र्धांगिनी श्रीमती गीता पहाड़ के साथ उनकी दो बेटियों कोमल पहाड़ व मोनल पहाड़ के साथ बेटे जतीन पहाड़ ने गजानन स्वरूपा श्वेतार्क मूल को भगवान के पालके में स्थापित किया और इसे जनेउ आदि धारण कर पूजा अर्चना की। पहाड़ के घर श्वेतार्क गणेश के अवतरित होने की खबर पर पड़ोसियों और सगे संबंधी भी यहां पहुंच रहे है और श्वेतार्क गणपति के दर्शनलाभ ले रहे हैं।

Tuesday, July 27, 2010

आखिर गई जान

जानवरों के प्रति क्रूरता रोकने और जनजागरूकता पैदा करने के लिए गत दिनों ब्रिटीश रॉयल सोसायटी ने यह तस्‍वीर जारी की है। निकिता नाम की इस कुतिया को उसका मालिक फ्लेट में अकेला छोड़कर शहर से बाहर चला गया था। इस दौरान निकिता भूख प्‍यास और अकेलेपन से बैचेन होकर कमरे से बाहर निकलने का रास्‍ता तलाशने लगी। इसी क्रम में उसका सिर हवा रोकने वाली जाली में फंस गया और अंत में उसकी मौत हो गई। मालिक को सजा के तौर पर पांच साल तक किसी पालतू जानवर को न पालने की सजा सुनाई गई। साथ ही बिना पारिश्रमिक के सौ घण्‍टे काम करने का दण्‍ड भी दिया गया।

Thursday, July 8, 2010

विश्‍व का सबसे लंबा युगल

विश्‍व का सबसे लंबा युगल इग्‍लेण्‍ड का है। यहां के विल्‍को वान क्‍लीफ का कद सात फीट और उसकी अश्‍वेत पत्‍नी का कद 6 फीट 5 इंच हैं। इनका लंबा कद गिनीज बुक ऑफ वल्‍डे रिकार्ड में दर्ज है।

आईये देखते है इस लंबू परिवार को

Tuesday, June 29, 2010

गैस सिलेण्‍डर की भी होती है एक्‍सपायरी डेट

जी हां, घरेलू गैस सिलेण्‍डर की भी एक्‍सपायरी डेट होती है और एक्‍सपायरी डेट निकलने के बाद गैस सिलेण्‍डर को इस्‍तेमाल करना बम की तरह खरतनाक हो सकता है। आमतौर  पर गैस सिलेण्‍डर की रिफील लेते समय उपभोक्‍ताओं का ध्‍यान इसके वजन और सील पर ही होता है। उन्‍हें सिलेण्‍डर की एक्‍सपायरी डेट की जानकारी ही नहीं होती। इसी का फायदा एलपीजी की आपूर्ति करने वाली कंपनियां उठाती हैं और धड़ल्‍ले से एक्‍पायरी डेट वाले सिलेण्‍डर रिफील  कर हमारे घरों तक पहुंचाती हैं। यहीं कारण है कि गैस सिलेण्‍डरों से हादसे होते हैं।

कैसे पता करें एक्‍सपायरी डेट
सिलेण्‍डर के उपरी भाग पर उसे पकड़ने के लिए गोल रिंग होती है और इसके नीचे तीन पट्टियों में से एक पर काले रंग से सिलेण्‍डर की एक्‍सपायरी डेट अंकित होती है। इसके तहत अंग्रेजी में ए, बी, सी तथा डी अक्षर अंकित होते है तथा साथ में दो अंक लिखे होते हैं। ए अक्षर साल की पहली तिमाही (जनवरी से मार्च), बी साल की दूसरी तिमाही (अप्रेल से जून), सी साल की तीसरी तिमाही (जुलाई से सितम्‍बर) तथा डी साल की चौथी तिमाही अर्थात अक्‍टूबर से दिसंबर को दर्शाते हैं। इसके बाद लिखे हुए दो अंक एक्‍सपायरी वर्ष को संकेत करते हैं। यानि यदि सिलेण्‍डर पर डी 09 लिखा हुआ हो तो सिलेण्‍डर की एक्‍सपायरी दिसंबर 2009 है। इस सिलेण्‍डर का दिसम्‍बर 2009 के बाद उपयोग करना खतरनाक होता है। इस प्रकार के सिलेण्‍डर बम की तरह कभी भी फट सकते हैं। ऐसी स्थिति में उपभोक्‍ताओं को चाहिए कि वे इस प्रकार के एक्‍सपायर सिलेण्‍डरों को लेने से मना कर दें तथा आपूर्तिकर्त्‍ता एजेंसी को इस बारे में सूचित करें।  (साभार इवनिंग प्‍लस)

आईये देखते है कहा लिखी होती है एक्‍सपायरी डेट, नीचे के दोनों सिलेण्‍डरों में से एक में ए 11 तथा दूसरे में ए बी अंकित किया हुआ है अर्थात पहला सिलेण्‍डर मार्च 2011 में तथा दूसरा मार्च 2020 में एक्‍सपायर होने वाला है। 



Monday, June 28, 2010

विश्‍व का सबसे बड़ा सोने का सिक्का

विश्व का सबसा बड़ा सोने का सिक्का 40 लाख डॉलर में बिका है. इसकी नीलामी विएना में हुई. इस सिक्के का वज़न 100 किलोग्राम है और इसका डाएमीटर 53 सेंटीमीटर है. गिनीज़ बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स में भी इस सिक्के का ज़िक्र है.


बताया ज्राता है कि सिक्के को धातुओं से जुड़ी स्पेन की एक कंपनी ने खरीदा है. इस नीलामी का आदेश एक ऑस्ट्रियाई निवेश ग्रुप के दीवालीया होने के बाद दिया गया था.

एवीब्ल्यू इन्वेस्ट नाम के ग्रुप ने इस सिक्के को 2007 में खरीदा था. कनाडा के मेपल लीफ़ वाले पांच ऐसे सिक्के हैं जिनकी क़ीमत करीब 10 लाख डॉलर है और जिन पर महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय की तस्वीर है. नीलाम हुआ सिक्का उन्हें पांच सिक्कों में से एक है.

विश्व के सबसे बड़े सोने के सिक्के की नीलामी उसकी आंकी गई क़ीमत से कहीं ज़्यादा पैसों में हुई. नीलामीघर का कहना है कि ऐसा विश्व में सोने के तेज़ी से बढ़ रहे दामों के कारण हुआ है.

साभार  बीबीसी
 

Thursday, June 17, 2010

एक वर्ष की बच्‍ची के पेट में पलते जुड़वा बच्‍चे

चीन में एक बच्‍ची के पेट में जुड़वा बच्‍चे पल रहे हैं। इस बात का पता उसके माता पिता को तब चला जब दिनों दिन बच्‍ची के बढ़ते पेट को देखकर इसे अस्‍पताल ले गए। डॉक्‍टर जांच करने के बाद हैरान थे कि इस बच्‍ची के पेट में जुड़वा बच्‍चे पल रहे हैं, जो कि उसके गर्भाशय में न होकर अन्‍य जगह हैं। इस बार में चिकित्‍सकों का कहना है कि ऐसे केस 5 लाख में से एक ही पाया जाता है।


एक होटल कचरे का


सड़क और समुद्री किनारों पर सैर सपाटा करने वाले लोगों द्वारा अक्‍सर पानी की बोतलों, चिप्‍स के पैकेट और फलों के छिलकों को फेंक दिया जाता है, ऐसे ही लोगों के सामने प्रदूषण को रोकने के लिए इटली में पर्यावरणविदों द्वारा एक पहल की गई है। इसके तहत जर्मनी के कारीगर एचए शुल्‍ट ने सेना की मदद से रोम के बाहरी हिस्‍से में स्थित कापोकोटा बीच पर एक अस्‍थाई होटल *सेव द बीच* तैयार किया है जो पूरी तरह से इसी प्रकार के कूड़े कचरे से बनाया गया है। विश्‍व में अपनी तरह के इस अनोखे होटल का निर्माण कचरे से समुद्री किनारों को प्रदूषित करने वाले लोगों का ध्‍यान खिंचने के लिए किया गया है। इस होटल के निर्माण में 12 टन कचरे का इस्‍तेमाल किया गया है।
यहां क्लिक कर नज़ारा देखें





Sunday, June 13, 2010

फुटबाल जैसा ही फुटबाल लिली का फूल

इन दिनों सारे संसार में फुटबाल वर्ल्ड कप का जूनून दिखाई दे रहा है, ऐसे में मेरे गार्डन में एक ऐसा फूल खिला है जो फुटबाल जैसा ही होता है और इसे  फुटबाल लिली ही कहा जाता है। यह फूल वर्ष में एक ही बार खिलता है और फूल देने का समय भी निश्चित है। मेने देखा है कि यह 15 से 20 जून के बीच ही खिलता है। जून के पहले सप्ताह में यह पौधा पूरी तरह ख़त्म हो जाता है और कुछ ही दिनों में इसकी पत्तियाँ आ जाती है और अचानक ही इसका फुटबाल जैसा फूल खिल जाता है। मैं पिछले दो सालो से इसे इसी रूप में देख रहा हूं। है ना ख़ास खबर.

Friday, June 11, 2010

करेंसी नोटों पर तितली के रंग

अगर वैज्ञानिकों के प्रयास सफल हुए तो आने वाले सालों में नकली करेंसी नोट छापने वालों को काला धंधा चौपट हो जाएगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि तितलियों के पंखों की रंग संरचना को यदि नैनो तकनीकि के माध्‍यम से करेंसी नोटों के लिए इस्‍तेमाल किया जाए तो उसकी नकल नहीं की जा सकेगी क्‍योंकि तितलियों के पंखों की रंग संरचना अत्‍यन्‍त गहन व सूक्ष्‍म बनावट वाली होती है । 

Thursday, June 10, 2010

दस हजार रूपये किलो का गुड़

भटिंडा में पंसारी की एक ऐसी दुकान है जहां पर गुड़ दस हजार रूपये किलो तक का उपलब्‍ध है। जी, हां यहां पर गुड़ बेशकिमती चीज की तरह ही बिकता है। ओल्‍ड इज गोल्‍ड की तर्ज पर इस गुड़ की कीमत इतनी अधिक हो गई है। आसपास के इलाकों में देसी दवाखाना चलाने वाले वैद्य इस पुराने गुड़ को विभिन्‍न प्रकार की दवाएं तैयार करने में उपयोग में लेते हैं। गुड़ की कीमत उसकी उम्र के अनुसार 50 रूपये से लेकर 120 रूपये प्रति दस ग्राम तक है। मौजूदा समय में दुकान का कामकाज देखने वाले परिवार की तीसरी पीढ़ी के संदीप कुमार कोली के अनुसार उनके दादा बाल मुकुंद गांव के मशहूर वैद्य थे और उनके पास काफी पहले का गुड़ था। दादा की मौत के साथ वैद्यखाना तो बंद हो गया लेकिन उनके पिता ने पंसारी व देसी दवाओं का काम शुरू किया। वर्तमान में उसके पास सबसे पुराना 120 वर्ष पुराना गुड़ है परंतु इसकी माञा बहुत कम हैं, इसी कारण यह बहुत मंहगा बिकता है।

Tuesday, May 25, 2010

कलयुग में शेषनाग

भारतीय संस्‍कृति में नागों की पूजा का विशेष महत्‍व है और इसी के तहत भारतीय पौराणिक कथाओं में क्षीरसागर में विष्‍णुशैय्‍या के रूप में शेषनाग का जिक्र आता है परंतु कलयुग में शेषनाग का दर्शन हो तो यह आश्‍चर्य का विषय है। कर्नाटक के मेंगलुर के पास कुक्‍के सुब्रमण्‍यम में पांच फनों वाले नाग के मिलने के बाद उसे देखने वाले श्रद्र्धालुओं का तांता लग गया। आइये करते है कलयुग में शेषनाग के दर्शन







Thursday, March 25, 2010

बूढ़े वृक्षों को मिली नई ज़मीन

दैनिक भास्‍कर के जयपुर संस्‍करण में एक रोचक और प्रेरक समाचार प्रकाशित हुआ था। राजमार्ग को चौड़ा करने के लिए जब बड़े बड़े पेड़ो को काटने के स्‍थान पर प्रोजेक्‍ट निदेशक राजीव लुंकड़ ने जो किया वह वास्‍तव में अनोखा और प्रेरणादायी है। आशा है आपको भी पसंद आएगा ।


Monday, March 22, 2010

पानी पर पहरा

ज विश्‍व जल दिवस है, गत दिनों जिला कलक्‍टर साहब के साथ एक भ्रमण दौरान एक निजी हेण्‍डपंप पर ताले का एक नज़ारा हमारे डूंगरपुर जिले में दिखाई दिया है, अजीब है यह नज़ारा परंतु यह हमारे भविष्‍य की ओर संकेत करता भी दिखाई देता है । वह दिन दूर नहीं जब हर पेयजलस्रोत पर इसी तरह पहरा दिखाई दे।


Sunday, March 14, 2010

तेंदुआ छिपकली, चीता सांप

यूं तो प्रकृति में विविध रूप जीवों का मानो खजाना है परंतु कई बार एसे अद्भुत रूप में जीव सामने आ जाते हैं जिन पर ताज्‍जुब हो उठता है। तेंदुए जैसी चित्‍तीयों वाली छिपकली की खोज तब हुई थी जब ग्रेटर मेकांग क्षेञ में 163 प्रजातियां पाई गईं। यह क्षेञ पांच देशों में होता हुआ फैला है और वियतनाम की विशाल मेकांग नदी से लगा हुआ है। मेकांग नदी तिब्‍बत के पठारों से निकल कर चीन के युनान प्रांत, म्‍यांमार (बर्मा), थाईलेण्‍ड, लाओस, कम्‍बोडिया और वियतनाम तक बहती है। इसकी घाटी में जैव विविधता का अपार भण्‍डार है जहां से प्रजातियां खोजी गई। वर्ल्‍ड वाईड फण्‍ड फोर नेचर ने ऐसे ही कुछ अद्भुत जीवों की तस्‍वीरें जारी की थी उनमें से यह है चीते जैसी धारियों वाले सांप की तस्‍वीर। यह सांप दक्षिणी वियतनाम में मिला था और दुनिया के 163 नई प्रजातियों में शामिल है।

डूंगरपुर की सपना बनी रानी मुखर्जी की फेन नम्बर वन

डूंगरपुर जिले की युवा प्रतिभा सपना चौबीसा ने सोनी टीवी पर शनिवार रात्रि प्रसारित हुए रियलिटी शो ‘लिफ्ट करादे’ में विजेता बन कर शहर व जिले का गौरव बढ़ाया है।
शहर के आदर्श नगर लिंक रोड़ निवासी सपना उर्फ प्रवीणा चौबीसा गत दिनों जयपुर के सेंट विल्फ्रेड्स कॉलेज में सोनी और यशराज फिल्म्स की ओर से अपने चहेते सुपरस्टार के प्रति दिवानगी और समर्पण दिखाने के लिए आयोजित हुए कॉन्टेस्ट ‘मेरा सबसे बड़ा फैन बनेगा मेरा हीरो’ के ऑडिशन में चयनित होने के बाद शनिवार को दो अन्य प्रतिभागियों को हरा कर रानी मुखर्जी की फेन नम्बर वन का खिताब हासिल किया। इस खिताब को हासिल करने के बाद शो में खुद रानी मुखर्जी ने सपना को गोल्ड मेडल पहनाया और मुलाकात कर अपना आशीर्वाद प्रदान किया।

रानी मुखर्जी व करण जौहर ने दी डूंगरवासियों को बधाई ः
डूंगरपुर की एक बेटी के सोनी टीवी पर कार्यक्रम प्रस्तुति को देखने के लिए जमा जिलेवासियों व शहरवासियों के लिए गौरव का पल तो तब था जब बालीवुड एक्ट्रेस रानी मुखर्जी और ख्यातनाम फिल्म निर्माता व निर्देशक करण जौहर ने सपना द्वारा हासिल किए गए खिताब के लिए डूंगरपुरवासियों को संबोधित करते हुए बधाई दी। दोनों कलाकारों ने कहा कि डूंगरपुरवासियों की शुभकामनाओं की बदौलत सपना ने खिताब हासिल किया है इसके लिए समूचा डूंगरपुर बधाई का पात्र है।

निकल आए खुशी के आंसू ः
सोनी टीवी पर शो के विजेता बनने की घोषणा जैसे ही हुई तो जिला परिषद के पंचायत प्रकेाष्ठ में कार्यरत सपना की मम्मी प्रेमलता चौबीसा और परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू निकल आए। एक कलाकार के रूप में टीवी पर आने की सपना की कोशिश और मम्मी के सपने को पूरा करने का संकल्प को साकार होते देखना सभी के लिए खुशी का पल था और इसको सबने साथ बैठकर देखा। परिजनों का कहना था कि वह इस रियलिटी शो के जरिये सपना ने खुद को नहीं अपितु डूंगरपुर को पूरे हिन्दुस्तान में मशहुर करने का सपना देखा था जो साकार हुआ है।



डूंगरपुर की सपना चौबीसा बालीवुड एक्टे्रस रानी मुखर्जी के साथ शनिवार को सोनी टीवी के रियलिटी शो ‘लिफ्ट करा दे’ में विेजेता घोषित होने के बाद ।

Saturday, March 13, 2010

खिल उठा दुर्लभ अशोक

रावण की लंका में स्थित अशोक वाटिका का वह वृक्ष जिसकी छांव तले बैठने तथा इसके फूलों की भीनी महक से देवी सीता के शोक का हरण हुआ, इन दिनों डूंगरपुर जिले में भी अपनी मोहक आभा बिखेरने लगा है। सीता-अशोक (सराका इण्डिका) नामक यह दुर्लभ वृक्ष शहर के पर्यावरण प्रेमी वीरेन्द्रसिंह बेड़सा के निवास पर एक गमले में ही पुष्पित हुआ है। गत चार वर्षों पूर्व रोपे गए मात्र ढाई-तीन फीट ऊॅंचाई के इस पौधे पर खिले शानदार फूलों को देखकर न केवल बेड़सा अपितु पर्यावरणप्रेमियों की खुशी का भी ठिकाना नहीं रहा। इस पौधे पर नारंगी-लाल रंगों की फूलों की आभा देखते ही बन रही है। उल्लेखनीय है कि भारतीय धर्म, संस्कृति व साहित्य में प्रमुख स्थान प्राप्त इसी अशोक वृक्ष के तले ही गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था और भगवान महावीर स्वामी को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। प्रचलित मान्यताओं अनुसार चेैत्र शुला अष्टमी के दिन अशोक वाटिका में इसी वृक्ष के नीचे हनुमानजी के हाथों भगवान राम का संदेश व मुद्रिका (अंगूठी) प्राप्त हुई थी। इन्हीं मान्यताओं के कारण अशोकाष्टमी के दिन महिलाएं इसका पूजन कर सौभाग्य की कामना करती है। कामदेव के बाणों में एक बाण इसका पुष्प भी है अतः इसे प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इसके पुष्प, पत्तियों, छाल व फलों का उपयोग कई प्रकार की औषधियों के रूप में होता है।



Tuesday, March 2, 2010

रिश्‍वतखोरों के लिए जीरो का नोट

आपसे कोई रिश्‍वत मांगता है तो आपको दुखी होने की जरूरत नहीं है, अब आप उसे शर्मिन्‍दा करते हुए रिश्‍वत मांगने के लिए हतोत्‍साहित भी कर सकते हैं। यह खास कारनामा कर दिखाया है फीफ्थ पिलर नामक एक गैर सरकारी संस्‍था ने। इस संस्‍था ने एक ऐसा नोट पेश किया है जो दिखने में पचास रूपये जैसा ही है परंतु इसकी किमत है शून्‍य। मतलब इससे कुछ नहीं खरीदा जा सकता और इसी कारण इसे जीरो नोट नाम दिया गया है। नोट के एक तरफ लिखा हुआ है, मैं वादा करता हूं कि न मैं रिश्‍वत लूंगा, न दूंगा। इस संस्‍था ने ऐसे कम से कम दस लाख जीरो नोट बांट दिए हैं और इसका कार्य जारी है। संस्‍था ने अपील की है कि यदि कोई आपसे रिश्‍वत की मांग करे तो एक जीरो नोट उसे थमा दें। इससे रिश्‍वतखोर को तो झेंप महससू होगी ही आपकी रिश्‍वत नहीं देने की प्रतिबद्धता भी बची रहेगी।
(अन्‍तर्राष्‍ट्रीय भ्रष्‍टाचार शोध संस्‍था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के मुताबिक सरकारी दफ्तरों में भ्रष्‍टाचार के मामले में भारत दुनिया के 180 देशों में 85 वें स्‍थान पर है)


Sunday, January 31, 2010

बैंकाक एयरपोर्ट पर समुद्र मंथन

खबर मिली है कि थाईलेण्‍ड के नए स्‍वर्णभूमि एयरपोर्ट पर विष्‍णुपुराण में उल्‍लेखित समुद्रमंथन प्रसंग का विशाल मॉडल स्‍थापित है। भारतवासियों के लिए यह गौरव का विषय है कि हमारी सांस्‍कृतिक थाति को विदेशों में भी पहचान मिलने लगी है। देखे कुछ गौरवशाली नज़ारे









Sunday, November 22, 2009

शिकार करने आए, खुद शिकार हो गए

तंजानिया में सेरेनजेटी राष्‍ट्रीय उद्यान में मारा नदी के किनारे एक मगरमच्‍छ अपने शिकार के लिए निकला पर दरियाई घोड़े का शिकार बन बैठा। दरअसल वह दरियाई घोड़े के बच्‍चे का शिकार करने का प्रयास कर रहा था जो कि उसे नागवार गुजरा और उसने मगरमच्‍छ को धरदबोचा। प्राणी विज्ञानियों के मुताबिक दरियाई घोड़े आपस में बहुत कम ही झगड़ते हैं।


(जयपुर से प्रकाशित न्‍यूज टुडे से साभार)

Monday, October 12, 2009

दुनिया में उड़ने वाला सबसे बड़ा पक्षी - भारतीय सारस

भारतीय सारस दुनिया में उड़ने वाले सबसे बड़े पक्षी के रूप में पहचाना जाता है। सदा ही जोड़े में रहने वाला यह पक्षी अपने वृहदाकार और सुन्‍दर शरीर के साथ ही प्रजननकाल में करने वाले आकर्षक नृत्‍य और आकर्षक उड़ान के कारण आकर्षण का केन्‍द्र रहता है। सबसे दुखद पहलु यह है कि यह पक्षी धीरे-धीरे विलुप्ति की ओर जा रहा है। एक अध्‍ययन के अनुसार अब यह माञ आठ हजार की संख्‍या में रह गया है। राजस्‍थान के दक्षिण अंचल वागड़ (बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिले) के लिए हर्ष का विषय है कि यहां के जलस्रोतों में बड़ी तादाद में यह पक्षी प्रजननरत है। अकेले डूंगरपुर जिले में तीन दर्जन से अधिक सारसक्रेन प्रजननरत देखे गए हैं। जिले के घुघरा गांव स्थित जलाशय में प्रजनन करते सारस के ये फोटोग्राफ खासतौर पर सुधीपाठकों के लिए उपलब्‍ध कराए जा रहे हैं।

अब देखिये इसकी आकर्षक उड़ान का एक दृश्‍य

अब नीचे देखे, ,खुले में ऐरा घास पर बनाए गए घौसले में दिया गया अण्‍डा। और अण्‍डे के उपर बैठी मादा सारस क्रेन ।



Sunday, October 4, 2009

प्रकृति ने बनाई भारत की तस्वीर

कभी कभी प्रकृति इसे नज़ारे दिखाती है कि हमे विश्वास ही नही होता , एक एसा ही नज़ारा बाँसवाडा पी आर ओ डॉ दीपक आचार्य ने हमे भेजा है।


Friday, October 2, 2009

दिव्‍य प्रकाशयुक्‍त मेढ़क

अमेरिका में फ्‍लोरिडा के पामबीच में ये मेढ़क विद्युत सज्‍जा का नन्‍हा बल्‍ब निगल गया तो इसका शरीर मानो दिव्‍य प्रकाश से आलोकित हो उठा। दरअसल ये मेढ़क बल्‍ब पर बैठे एक कीट को निगलने के फेर में था। (जयपुर से प्रकाशित दैनिक महका भारत के 29 सितम्‍बर के अंक से साभार)

अब देखिये दो रंगों वाला सेब

जी हां खण्डित व्‍यक्तित्‍व का प्रतिरूप यह दो रंग का सेब भी बिल्‍कुल असली है। इग्‍लेण्‍ड के डेवोन शहर के समीप एक किसान के बाग में उपजी इस सेब के हरे व लाल रंग सेब को बिल्‍कुल आधे-आधे भाग में विभक्‍त कर रहे हैं। जानकारों के अनुसार इसे आनुवंशिकी परिवर्तन का बेजोड़ नमूना कहा जाएगा। (जयपुर से प्रकाशित दैनिक महका भारत के 26 सितम्‍बर के अंक से साभार)

Friday, September 25, 2009

मौत के मुँह में मासूम

जंगलों से भटकते हुए भोजन की तलाश में रिहायशी इलाकों में घुस आने वाले वन्‍यजीव अधिकांश प्रकरणों में मौत के शिकार होते है। कभी सड़क दुर्घटना तो कभी बिजली के तारों में उलझने से होने वाली बड़ा दुखद विषय है। मौत के मुँह में जाते एक जीव का एक ऐसा ही नज़ारा कुछ इस तरह दिखाई दिया।
आमेर में गांधी चौराहे पर बिजली के तार के उपर लगे टेप को हटाते इस मासूम को पता नहीं कि इसका क्‍या हश्र होने वाला है। स्‍थानीय लोगों का कहना है कि आए दिन इसी तरह की दुर्घटनाओं के शिकार होते है बंदर।
*(जयपुर से प्रकाशित दैनिक 'न्‍यूज़ टुडे' के 23 सितम्‍बर 09 के अंक में प्रकाशित खबर पर आधारित)

Tuesday, September 8, 2009

टमाटर में मिले गजानन


Monday, September 7, 2009

नाशपाती में बुद्ध

कहते है प्रयास करने पर भगवान भी मिल जाते है। भगवान को साक्षात तो नहीं परंतु अपने बगीचे के पौधों में पाने का एक ऐसा ही प्रयास किया है चीन के एक किसान गाओ जियानझांग ने । खबर है कि इस किसान ने अपने बगीचे में लगने वाले नाशपातियों में भगवान बुद्ध को रूपायित किया है। उसने इस साल ऐसी करीब 10 हजार नाशपातियां उगाई है जिन्‍हें वह जल्‍द ही ब्रिटेन के बाजारों में बेचने ले जाएगा। जियानझांग पेड़ पर लगी नाशपातियों को बुद्ध की आकृति के लकड़ी के फरमे में बांध कर ऐसा आकार देने में कामयाब हुआ है।
अब जरा आप भी देखिये नाशपातियों में बुद्ध कैसे दिखाई देते हैं -----

(जयपुर से प्रकाशित दैनिक 'महका भारत' से साभार)

Sunday, September 6, 2009

झांसी की रानी की असली तस्‍वीर

अब तक आपने झांसी की रानी की तस्‍वीर किताबों में स्‍केच या कैनवास पर ब्रश से बनी तस्‍वीर के सहारे ही देखी होगी, लेकिन अब सामने आई है झांसी की रानी की असली तस्‍वीर। झांसी की रानी का 1850 में खींचा गया फोटो अंग्रेज फोटोग्राफर हॉफमैन ने लिया था। पिछले दिनों वर्ल्‍ड फोटोग्राफी डे यानी 19 अगस्‍त को कुछ खास चिञकारों की प्रदर्शनी का आयोजन भोपाल में किया गया था। इस प्रदर्शनी में अहमदाबाद के एक एंटिक फोटो कलेक्‍टर ने ये फोटो खास तौर पर भेजी थी। अभी तक ऐसा माना जा रहा था कि दुनिया में रानी लक्ष्‍मीबाई की तस्‍वीर नहीं है लेकिन इस तस्‍वीर के सामने आने से लोगों को रानी के असली स्‍वरूप का पता चल पाया है। गौरतलब है कि हाल ही में जी टीवी पर रानी लक्ष्‍मीबाई पर बना हुआ सीरियल भी शुरू हुआ है। उम्‍मीद है कि जल्‍द ही यह तस्‍वीर किताबों में भी छपी मिल सकती है।
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ये है सीरियल की रानी लक्ष्‍मीबाई
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ये है रानी लक्ष्‍मीबाई की असली तस्‍वीर
(जयपुर और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पञ ' न्‍यूज़ टुडे' के दिनांक 2 सितम्‍बर के अंक में प्रकाशित समाचार से साभार )